ज़िन्दगी-एक जश्ऩ

आज घर लौटते समय, सड़क के किनारे रहते कुछ बच्चों को देखा।

वैसे तो उन्हें सड़कों पर भीख मांगना सिखाया गया था,

पर आज वो कुछ अलग दिखे;

इस बार वो हंसते और मुस्कराते हुए दिखे।

उन्हें देख कर थोड़ी हैरानी हुई, थोड़ा अचम्भा हुआ,

पर उन्हें इस तरह खिलखिलाते हुए देख, एक अनोखा एहसास हुआ।

वो बारिश में खेलते बच्चे, जिनके पास ना रोज़ पेट भरने को रोटी, ना पहनने को कपड़े और ना ही कोई मकान था;

वो बच्चे अपनी ज़िंदगी अपनी खुद की अठखेलियों से भरे हुए थे।

इन बच्चों ने आज सही मायनों में ज़िन्दगी जीना सिखा दिया

क्यों हम अपनी खुशी ‌की चाबी किसी और के हांथों में सोंप देते हैं ?

क्या हम अपनी ज़िंदगी बिना किसी के खुशी दिए हुए नहीं व्यतीत कर सकते ?

क्यों नहीं हम अपनी ज़िंदगी के हर लम्हे को एक जश्ऩ बना लेते ?

अगर ज़िन्दगी का हर एक पल जीया जाए तो ज़िन्दगी खुद ही एक जश्ऩ बन जाती है !

~ Ojassvi Pradhan ( Instagram : @ojassvi._pradhan )

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